320 दिनों में 300 से ज्यादा आतंकवादी घटनाएं, हजारों की मौत

पेरिस हमलों की एक बानगी सारे जहां ने देखी, दुनिया के हर चैनल ने इसे प्रमुखता से दिखाया। सभी लोगों को मानो आतंकवाद से नफरत हो गई। लेकिन पेरिस पर हुआ हमला आतंकवाद का कोई एक उदाहरण नहीं है। आज तकरीबन 60 ऐसे देश हैं जो आतंकवाद से सीधेतौर पर हमले झेल रहे हैं, और लगभग सारी दुनिया इससे प्रभावित हो रही है।

फ्रांस पर हुए आतंकवादी हमले एक दिन पहले ही ईस्लामिक स्टे
ट ने लेबनॉन के शहर बैरूत पर भी हमला किया। यहां भी दो आतंकवादियों ने स्कूल और मस्जिद के पास आत्मघाती हमले में 40 से ज्यादा लोगों को मार दिया और 250 से ज्यादा लोगों को घायल कर दिया।

18 नवंबर को बोकोहराम ने भी दरिंदगी दिखाते हुए नाईजीरिया के शहर योला में आत्मघाती हमले में 32 लोगों को मार दिया और सैकड़ों को घायल कर दिया। बोकोहरम ने भी खुद को ईस्लामिक मिलिटेंट घोषित कर दिया है। और अब वह खलीफा के लिए लड़ाई लड़ रहा है।

इस साल नवंबर माह तक 300 से ज्यादा आतंकवादी हमले अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में हो चुके हैं। साल के 365 दिनों के हिसाब से देखा जाए तो ये अनुपात ज्यादा डराने वाला है। अब यही उम्मीद है कि ये संख्या यही तक सिमट कर रह जाए।

बात मुद्दे की ये है कि क्या इन आतंकवादी घटनाओं का कोई अंत नहीं है, कोई समाधान नहीं है, क्या सभी गैर मुसलमानों को मुसलमान बन जाना चाहिए? क्या उसके बाद सब ठीक हो जाएगा! क्या फिर सभी कश्मीर की घाटियों में बेख़ौफ घूम सकेंगे? फिर यहुदियों को भी फलीस्तिनियों से डरने की जरूरत नहीं होगी (#israelsynagogueattack), वे अपने पूजा-घर में इबादत कर सकेंगे!  क्या फिर ईसाईयों को मुसलमानों से डरने की जरूरत नहीं होगी? (#muslimboyarrested)

अब बात आती है कि कौन से मुस्लमान बने? पैगम्बर मोहम्मद की राह पर चले या हसन-हुसैन की राह पर। हुसैन की राह पर चलें तो कट्टर और मोहम्मद की राह पर चले तो नकली? 72 फिरकों में मुसलमान समाज को बांट दिया है। आपस में ही लड़े जा रहे हैं, सुरक्षा की गारंटी कहां है?

 

 

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2 thoughts on “320 दिनों में 300 से ज्यादा आतंकवादी घटनाएं, हजारों की मौत

  1. बहुत खूब पवन। इस पोस्ट के जरिए आपने आतंकवाद की बढ़ती घटनाओं पर आंकड़े प्रस्तुत किये, in a non-parochial manner. इस से यह स्पष्ट है कि आतंकवाद किसी एक देश की समस्या नहीं है। It is time that we should not take it for granted and not take it as someone else’s problem. We never know when It can be used against us.. Its time we take a serious stance on it.. Rather than just speaking.. And its possible when Indian media shifts its concentration from daily soaps and reality shows.. What sells shouldn’t be more important.. What’s alarming.. What’s troubling the world need to be communicated to us.. So that we can understand the gravity of this issue.

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    1. मेरे साथ इस पोस्ट को समझने के लिए आपका बहुत-बहुत शुक्रिया। आपके विचारों से भूी मैं बिल्कुल सहमत हूं। जिस तरह से आतंकवाद अपने पैर पसार रहा है, उसे आगे नहीं बड़ने देना होगा और खत्म करना होगा।

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