रील लाईफ में परफेक्शनिस्ट, रीयल लाईफ में नॉनकन्फॉर्मिस्ट

आमिर खान ने ये साबित कर दिया है कि रील लाईफ के हीरो को कभी रियल लाईफ का हीरो नहीं बनाया जाना चाहिए। रील लाईफ में विद्वानों सा दिखने वाला आमिर रियल लाईफ में इतना बौंधू (नॉनकन्फॉर्मिस्ट) होगा किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी।

देश में असहिष्णुता के मुद्दे पर एक्सपर्ट राय देना वाला आमिर भूल गया कि वह किस मंच से राय दे रहा है। वैसे तो ये कलाकार अपनी पर्सनल लाईफ में किसी का दख़ल पसंद नहीं करते लेकिन विद्वान बनने के लिए अपने ड्रॉइंग रूम और बेडरूम की बातें भी शेयर करने में हर्ज नहीं करते।

इसकी पत्नी किरन राव को 6-7 महीने से लग रहा है, कि देश रहने लायक नहीं रहा है। किसी और ठिकाने की तलाश की जाए। यहां इनके बच्चे सुरक्षित नहीं है। अब सवाल ये उठता है कि ये दोनों किस देश की बात कर रहे थे, वही देश जिसकी संस्कृति और भगवान का मजाक बनाने के बाद भी वे चैन से रह रहे हैं।

भारतीय संविधान भारत के सभी नागरिकों को अपनी बात रखने की पूर्ण रूप से आजादी देता है। आमिर ने वही कहा जो उसे ठीक लगा, जो किरन को ठीक लगा। अगर आमिर के शब्दों पर गौर किया जाए तो उसने कहा कि “ किरन ने अखबार पढ़ने के दौरान ये राय बनाई कि ये देश अब (6-7 महीने से) रहने के लायक नहीं रहा”

इसमें किरन की कहीं कोई गलती नजर नहीं आती, हो सकता है उसने 6-7 महीने से अखबार पढ़ना शुरू किया हो। हो सकता है वह वस वही सास-बहू वाले न्यूज चैनल देखती हो, जिनके पास खबरों के अलावा सबकुछ होता है। अगर गृहमंत्रालय के आकड़ों पर नजर डाली जाए तो इस साल साम्प्रदायिक घटनाओं में कमी आई है।

गृहमंत्रालय के मुताबिक 2013 में जब यूपीए सरकार थी तब 694 दंगे हुए थे। 2015 में 630 दंगे हुए हैं। पिछले साल 95 लोगों की मौत हुई थी और इस साल 86 लोगों की मौत हुई है। जाहिर ये कि किस सरकार के शासन काल में ये देश रहने के लायक नहीं था।

लेकिन इस सवाल को भी अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए कि आतुल्य भारत कहते-कहते एक व्यक्ति असहिष्णु भारत कहने लगा। पहले वाली बात आमिर ने पैसे के लिए की थी लेकिन ये दूसरी बात दिमाग में पत्नी की लाई हुई है या कहीं और की पैदावार है?

आमिर ने सत्यमेव के जरिए हिंदुस्तान के कई रंग दिखाए, खैर वो सिर्फ पैसों के लिए था, लेकिन प्रोग्राम से कुछ तो सीखे होते। देश को जोड़ने की जगह आप डरावना माहौल पैदा कर रहे हैं। क्या आपने भी अपना कांग्रेसी रंग दिखाया है।

पक्का पता तो नहीं लेकिन गुगल बता रहा था कि ननिहाल की तरफ से आप कांग्रेसी लीडर अबुल कलाम आजाद और पैतृक परिवार की और से आपका डॉ जाकिर हुसैन से संबंध है।

एक बार कहने से पहले कन्फर्म कर लिया होता कि क्या कहा जा रहा है। या यूं ही अनपढ़-गंवार नेताओं की तरह आपने भी बक दिया जो बस बकना था। देश में जिस तरह से राजनीति गर्मा रही है उसे देखकर यही कही जा सकता है कि…

हर शाख पर उल्लू बैठा है, अंजाम-ए-गुलिस्ता क्या होगा…

 

 

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