भारत-नेपाल बस सेवा 27 साल बाद फिर से शुरू

भारत-नेपाल के संबंध एक बार फिर से पटरी पह लौटते नजर आ रहे हैं। 4 जनवरी से शुरू हुई बस सेवा संबंध सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा सकता है। सेवा भारत-नेपाल व्यापार एवं पारगमन संधि के मद्देनजर 27 साल पहले निलंबित कर दिया गया था।

यह सेवा 27 साल के अंतराल के बाद शुरू की गई है। इस बस सेवा के माध्यम से दिल्ली को कठमांडू से जोड़ गया है। ये बस दिल्ली में आनंद विहार आईएसबीटी से उत्तराखंड के चंपावत जिले से होती हुई कठमांडू पंहुचेगी।

इस सफर में किसी विशेष दस्तावेजों की आवश्यकता नहीं है। सेवा के माध्यम से दोनों देशों में रह रहे परिवार के साथ-साथ एक-दूसरे के साथ व्यापार संबंधों में भी फायदा होने की उम्मीद है।

भारत के नेपाल के साथ रहे दोस्ताना संबंधों को तब ग्रहण लग गया जब नेपाल में नए संविधान का निर्माण हुआ। हिंदु राष्ट्र से सेक्युलर राष्ट्र बनते ही नेपाल ने भारत जैसे बड़े भाई को दरकिनार कर दिया।

नए संविधान के खिलाफ मधेशी आंदोलन को भारत समर्थन बताकर नेपाल ने भारत के हर उस प्रयास पर पानी फेर दिया जो भारत नेपाल के लिए अभी तक करता आ रहा था। चाहे वह नेपाल में आए भयंकर भूकंप में मदद हो या हर वह संभव मदद किसी राष्ट्र निर्माण में सहयोग करती है।

इसके अलावा नेपाल, भारत-नेपाल संधि 1950 पर भी पुर्न:विचार चाहता है। नेपाल का मानना है कि यह संधि नेपाल की आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा और उसे संप्रभु राष्ट्र बनने से रोक रही है।

प्रधानमंत्री की 2014 की अगस्त यात्रा के दौरान नेपाल के साथ पावर ट्रेडिंग एग्रीमेंट भी साकार नहीं हो सका। नेपाल के अनुसार भारत का जल संसाधनों पर एकाधिकार चाहता है। जिससे ये समझौता पूर्ण रूप नहीं ले पा रहा है।

अनेक बाधाओं के बावजूद दोनों पक्षों में संबंधों को बेहतर करने की आशा नजर आती है। विदेशी मुद्रा की भारी राशि हासिल करने के लिए नेपाल ने भारत सरकार के प्रति मदद का हाथ बढ़ाया है। नेपाल के पास 83,000 मेगावाट बिजली पैदा करने की क्षमता है।

40,000 मेगावाट तकनीकी और आर्थिक रूप से व्यवहार्य है, इसी परियोजना में नेपाल भारत की मदद चाहता है। रुकी हुई परियोजनाओं से चिंतित नेपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया है कि महाकाली नदी पर 5600 मेगावाट की पंचेश्वर योजना जल्द जल्द से साकार हो सके।

यात्रा के अंत में जारी एक संयुक्त बयान के अनुसार, “दोनों पक्षों के तीन अन्य परियोजना विकास समझौते (पीडीए),  अरुण तृतीय, अपर Marsyangdi और तामाकोशी थ्री (Tamakoshi III) के शीघ्र निष्कर्ष के लिए इच्छा व्यक्त की।

प्रधानमंत्री की यात्रा पर संयुक्त बयान में दोनों देशों द्वारा यह आश्वासन दिया गया कि

  1. कोई भी देश अपनी जमीन एक दूसरे के खिलाफ इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं देगा।
  2. दोनों पक्षों अंतरराष्ट्रीय अपराधियों द्वारा खुली सीमा का दुरुपयोग कम करने के लिए कदम उठाएंगे।
  3. सीमा पार अपराध को कम करने, दोनों देशों के लिए एक प्रभावी संयुक्त सीमा प्रबंधन प्रणाली विकसित करेंगे।
  4. सीमा पर अंतरराष्ट्रीय अपराधों से निपटने के लिए निरंतर सतर्कता, संयुक्त गश्त और संयुक्त टास्क फोर्स के सृजन के माध्यम से सुधार की कवायद पर जोर।
  5. पांच सीमा द्वारों और चार इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट (आईसीपी “एस) पर सुरक्षा कड़ी करने पर सहमति।
  6. साथ ही सीमा पार व्यापार और पारगमन में सुधार करने के लक्ष्य से दोनों देश रेलवे के निर्माण के लिए योजना बना रहे हैं।
  7. यात्रा के अंत में जारी एक संयुक्त बयान के अनुसार, “दोनों प्रधानमंत्रियों ने सीमा पार से रेलवे के निर्माण में तेजी लाने के लिए सक्षम अधिकारियों को निर्देश दिया।

प्रधानमंत्री की यात्रा एक स्वागत योग्य कदम है, जिसकी सराहना की जानी चाहिए। भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र में सड़कों और रेलवे के बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर नेपाल के विकास में सहायक होगा।

 

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