क्या जानते हो प्यार के बारे में?

अक्सर हम सभी के साथ होता है। जब-जब ये सवाल कि क्या जानते हो प्यार के बारे में? सामने आता है हम उलझन में पड़ जाते हैं। समझ नहीं आता न कि इस सवाल का जवाब कैसे दिया जाए? दो लोग जब रिलेशनशिप में होते हैं तो वे कई सारी चीजें करते हैं जिससे एक-दूसरे को अहसास हो सके कि वे आपस में प्यार करते हैं।

फिर ये सवाल कैसे उठते हैं कि कैसा प्यार करते हो, कितना प्यार करते हो? ये प्यार में तोल-मोल का व्यापार कैसे होने लगता है? बड़ा मुश्किल हो जाता है किसी एक के लिए अपना प्यार साबित करते रहना और एक दिन वो थक जाता है।

तो दोस्तों मेरा कहना बस यही है कि अगर प्यार करो तो बस प्यार करो। फिर व्यापार मत करो। अगर सामने वाला गलत भी हो तो भी उससे प्यार करो जब तक कि आप थक नहीं जाते। यकीन मानिए जब आप थक जाएंगे अपना प्यार साबित करते-करते तो खुद ब खुद उस गलत इंसान के प्यार से अपने आप निकल जाएंगे।

एक बार जब आप गलत प्यार से निकल जाएंगे तो इस बार आप एक अनुभवी प्रेमी बनिए और एक ऐसा साथी ढूंढिए जिसे आप बहुत प्यार करें और वो आपको। लेकिन किसी को सबक सिखाना और किसी से बदला लेने की बात अपने मन में न रखें।

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प्यार की इस राह में बहुत हर्ट हो जाओगे…

अगर आप एक एवरेज दिखने वाले इंसान हैं और चाहते हैं कि आप किसी से बेइंतहा प्यार करें और कोई बदले में आपको भी वैसा ही प्यार करें तो एक खूबसूरत चेहरे के पीछे कभी मत भागना दोस्त। उस लड़की के पीछे अपना टाइम और फीलिंग्स बर्बाद मत करना। Continue reading “प्यार की इस राह में बहुत हर्ट हो जाओगे…”

भाजपा के 365 ‘अच्छे दिन’

‘अच्छे दिन आएंगे’ नारे के आधार पर पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आई भाजपा सरकार के कार्यों का लेखा-जोखा हर विदवान कर रहा है। जहां कुछ सरकार की नीतियों मे देश का भविष्य देख रहे हैं तो कुछ लोगों को ये नीतियां सिर्फ दूर के ढोल लग रही हैं। ये सरकार कोई आम सरकार नही है। ये करोड़ों लोगों के आशा की सरकार है, सपनों की सरकार है। हर तरफ बस यही आलम था कि इस सरकार के सत्ता में आते ही देश के मुखिया नरेन्द्र मोदी सब ठीक कर देंगे।

रोजगार, भ्रष्टाचार, काला धन, महंगाई, गरीबी आदि समस्याओं को खत्म करने के वादें सरकार ने कितने निभाए हैं और कितनी फैल हुई है? सपनों से निकलकर अगर यथार्थ की बात करें तो सरकार ने इन सब समस्याओं के निपटने के लिए कदम जरूर उठाए हैं। रोजगार के लिए प्रधानमंत्री की विदेशयात्रा के दौरान बार-बार विदेशी निवेश को न्यौता, प्रवासियों को आव्हान, उद्योगों को बढ़ावा और लघु उद्योगों पर जोर देना और उनके क्रियान्वान के लिए नीतियों का सरीलीकरण इस दिशा में उठाए प्रमुख कदम हैं।

इस एक साल के कार्यकाल के दौरान भाजपा सरकार भ्रष्टाचार से अछूती रही है। कई सारी योजनाओं में लगने वाला पैसा और हितग्राहियों के मिलने वाला पैसा ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के माध्यम से सीधे मिल रहा है। काला धन देश में वापिस लाने के लिए सरकार की सबसे पहल एसआईटी का गठन है। अन्य देशों के साथ द्विपक्षीय वार्ता से भी इस समस्या का हल निकाले जाने की कोशिश की जा रही है।

वर्तमान सरकार मुद्रा स्फीती दर को 4.5 अंक के साथ संतुलित करने में कामयाब दिख रही है। जिसकी एक खास वजह विदेशी बाजार में कच्चे तेल की कीमत का गिरना भी माना जा रहा है। वहीं देश में बन रहे साकरात्मक माहौल की वजह से आईएमएफ ने देश की जीडीपी वर्तमान वर्ष में चाइना से आगे जाने की संभावना व्यक्त की है, यह स्थिति गरीबी उन्मूलन के लिए कारगार साबित होगी।

वहीं देश को विकास की पटरी पर लाने के लिए सरकार को कई रास्ते तय करने होंगे। विदेश नीति पर धार फेरते वक्त सरकार को आंतरिक नीति को भी मजबूत करना होगा। और यह तब बहुत जरूरी हो जाता है तब भाजपा की सहयोगी पार्टी ही उसकी नीतियों का विरोध करती रही है। ‘सबका साथ सबका विकास’ के नारे के साथ चल रही भाजपा कई निर्णयों पर अकेले खड़े नजर आती है। मेक इन इंडिया का सपना नक्सलवाद और आतंकवाद का सफाया किए बिना साकार नहीं हो सकेगा। किसानों के नजरिए से भी सरकार कठघरे में खड़ी नजर आती है।

देश को मोदी जी से काफी उम्मीदें हैं। गुजरे साल के दौरान कई सारी योजनाओं ने मूर्त रूप लिया, कई बिल प्रस्तुत किए गए, जिन पर तीखी बहस के दौरान अध्यादेश लाए गए। बिल को गरीब विरोधी बताया गया। सरकार को पूंजीपतियों को हितैषी बताया गया। सरकार को ये छवि सुधारकर आमजन और किसानों के मन में विश्वास जगाना होगा।